रमण सिंह जी ” सौ चूहा खा के बिल्ली चली हज को “! किस लिए और किस करार पे आपने नहीं बल्कि कम्पनी ने ये ऋण संचालकों को दिया था? क्या सहज ने ये रकम हमे खेती करने के लिए दिया था ? क्या ये ऋण हमे बच्ची की शादी करने हेतु शुद पे मिला था ? या फिर ये रकम संचालक के बच्चे को आई० आई० टी० कराने हेतु दिया गया था ? अगर हाँ तो वो एकरारनामा की प्रति भी साथ में VLe को भेज देते, जिसमे इन बातों की जिक्र होती !
रमण सिंह जी ग़ालिब की उक्ति आप पे सटीक उद्धृत मालूम पड़ती है की ” हमे मालूम है ज़माने की हकीकत लेकिन ग़ालिब, दिल बहलाने का ख्याल अच्छा है “! शायद रमण सिंह जी को कार्यालय में उस दिन काम नहीं रहा होगा सो, टाइम पास या दिल को बहलाने के लिए ” नोटिस भेजो – नोटिस भेजो” का चोर सिपाही जैसा खेल – खेला होगा मनोरंजन के रूप में ?
रमण सिंह के बारे में मैं सुन रखा था की बड़े ही तेज तरार किसम के व्यक्ति हैं ! लेकिन ये नोटिस वाली खबर हमें मजबूर करता है इनको शातिर मानने के लिए ! हमें सारा सामान लोन के रूप में पंचायतों में कथित सरकारी सेवाओं को आम जनता तक कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से पहुचाने हेतु दिया गया था ! और उससे प्राप्त आमदनी के हिस्से से ऋण राशी को किश्तानुसार भुगतान करना था ! अब रमण सिंह बताएं की VLe लोगों का पोर्टल बिजनेस के रूप में कितना खर्च और आमदनी बता रहा है ? अगर कमाई हुई है तो बताया जाये, सभी संचालक आपको पैसे वापस करेंगे ! अगर नहीं हुई है तो फिर आप अब इस ऋण राशी के भुगतान की चिंता छोड़ दीजिये तो ही बेहतर होगा ! अब उन संचालकों का क्या होगा जो 6 साल पहले सिस्टम लिया था ? क्या अब वो सिस्टम 6 साल बाद कामयाब है ? कोई सोच सकता है की वो सिस्टम अब ज़माने के रफ़्तार के साथ दौड़ेगा ? अब जमाना 4G का आ चूका है, और बिना काम हुए सहज 1G का रिकवरी चाहता है ! मेरा सहज कम्पनी को सुझाव मात्र होगा की अब, सहज सरकार के ऊपर दबाव बनाये ताकि फिर से ज़माने की रफ़्तार के साथ काम करने वाला कम्प्यूटर और साजो समान संचालकों को पुनः ऋण के रूप में उपलब्ध कराया जाये ! जिससे आनेवाले दिनों में आमदनी हो सके और सहज की ऋण की भरपाई संचालकों द्वारा की जा सके !
अगर स्रेई सहज ये सोच रहा है की उसकी पूंजी डूब रही है, तो ये कम्पनी की नादानी है! कौन लौटाएगा हमारे मुजफ्फरपुर के संचालक स्व० कृष्ण कुमार के जीवन लीला को ? जो बेरोजगारी की असहनीय दर्द को बर्दाश्त न कर आत्म हत्या कर लिया ! कौन लौटाएगा मेरे स्वर्णिम कैरियर को जो मैंने त्याग कर इस बिजनेस को अपनाया ? ऐसे कई अनुतरित सवालों की जवाब स्रेई सहज कम्पनी तथा बिहार सरकार को आनेवाले दिनों में देना होगा! ये नहीं चलेगा की आपका ही दर्द सिर्फ दर्द होता ! औरों की दर्द………………?
कुमार रवि रंजन
नोडल – VLe
रोहतास, बिहार



























